निरसा: मैथन पावर लिमिटेड (MPL) द्वारा स्थानीय ग्रामीणों एवं विस्थापित परिवारों के साथ कथित रूप से हो रहे अन्याय, उपेक्षा और वादाखिलाफी के विरोध में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय विस्थापितों, ग्रामीणों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और अपने अधिकारों को लेकर एकजुट होकर आंदोलन की रणनीति तैयार की।बैठक में उपस्थित लोगों ने आरोप लगाया कि परियोजना के लिए वर्षों पहले उनकी जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन आज तक कई विस्थापित परिवार रोजगार, पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी द्वारा स्थानीय लोगों को रोजगार देने, क्षेत्र में विकास कार्य कराने तथा विस्थापित परिवारों के हितों की रक्षा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अधिकांश वादे अब तक अधूरे हैं।विस्थापितों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते आ रहे हैं, इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रहा है। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन चलाया जाएगा।इस बैठक में मुख्य रूप से झामुमो के जिला सह-सचिव तपन तिवारी, विस्थापित नेता कामाख्या चौधरी, चंडी मिश्रा, विश्वनाथ रोहिदास, मिथुन रोहिदास, वासुदेव महतो, किशोर हांसदा, अभिजीत तिवारी, रवि तिवारी, दिलीप लोहार और निमाई लोहार सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे।
