सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक… सब पर ‘युद्ध’ का साया
दुनिया के नक्शे पर भले ही युद्ध की जमीन भारत से हजारों किलोमीटर दूर मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में हो, लेकिन इसकी तपिश भारत के आम आदमी की रसोई तक पहुँच चुकी है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे भयंकर सैन्य टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तेल की सप्लाई रुकने का सीधा और सबसे क्रूर प्रहार भारत के मध्यमवर्ग और गरीबों की जेब पर हुआ है।
कहने को तो यह ‘तेल की लड़ाई’ है, लेकिन इस वैश्विक राजनीति के चक्रव्यूह में भारत की आम जनता पिस रही है। कल तक जो महंगाई दबे पांव आ रही थी, उसने अब देश के करोड़ों परिवारों के बजट की कमर तोड़ दी है।
सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक… सब पर ‘युद्ध’ का साया
इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सबसे पहला और बड़ा झटका देश के करोड़ों घरों में सुबह-सुबह पहुंचने वाले दूध को लगा है। देश की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्था अमूल (Amul) और मदर डेयरी (Mother Dairy) ने देश भर में दूध की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर तक का इजाफा कर दिया है।
अब दूध के लिए ढीली करनी होगी ज्यादा जेब:
- फुल क्रीम दूध: ₹70 से बढ़कर अब ₹72 प्रति लीटर हो गया है।
- टोंड मिल्क: ₹58 से बढ़कर ₹60 प्रति लीटर पहुंच चुका है।
डेयरी कंपनियों का क्या कहना है? कंपनियों का सीधा तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $100 प्रति बैरल पार कर चुकी हैं। इस वजह से माल ढुलाई (Transportation) और पैकेजिंग मटेरियल की लागत बढ़ गई है। साथ ही पशुचारे के दाम भी आसमान छू रहे हैं, जिसके कारण कीमतें बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया।
₹3 प्रति लीटर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, राशन पर चौतरफा मार
वैश्विक संकट के दबाव में आकर भारतीय तेल कंपनियों ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही रसोई गैस (LPG) के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।
जब डीजल महंगा होता है, तो खेत से लेकर मंडियों तक सब्जी, दाल, चावल और आटा पहुंचाने वाले ट्रकों का भाड़ा बढ़ जाता है। नतीजा यह है कि हर खाने-पीने के सामान (FMCG) पर कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं या फिर पैकेट का साइज छोटा कर रही हैं। आम आदमी की थाली से दाल-सब्जी गायब होने की कगार पर है।
