धनबाद। गायत्री शक्तिपीठ बस्ताकोला में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें जिले भर से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह प्रभात फेरी से हुई। इस दौरान उपस्थित परिजनों ने पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीया माता जी के चरणों में प्रखर प्रज्ञान एवं सजल श्रद्धा रूपी पुष्प अर्पित किए। यज्ञ की शुरुआत गायत्री मंत्रोच्चार के साथ हुई, जिसे श्रीमती लता जायसवाल और राजकुमारी शर्मा ने अपनी टीम के साथ सामूहिक रूप से संपन्न कराया।अनुष्ठान के दौरान गुरु के अर्थ और महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का अर्थ प्रकाश होता है। अर्थात जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाए, वही गुरु है। सनातन धर्म में बिना गुरु के ईश्वर प्राप्ति संभव नहीं मानी गई है। प्राचीन काल से ही आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को शिष्य अपने गुरु के प्रति श्रद्धा प्रकट करते आ रहे हैं। इस अवसर पर निशुल्क गुरु दीक्षा एवं विभिन्न संस्कार संपन्न कराए गए तथा सभी के लिए महाप्रसाद का वितरण किया गया।कार्यक्रम के अंत में आरती एवं शांति पाठ के साथ महायज्ञ का समापन हुआ। इसे सफल बनाने में मुख्य ट्रस्टी विभूति शरण सिंह, नरेश भट्ट, ए.के. गौतम, लता प्रसार, नमिता विश्वकर्मा, दुलारी पाठक, मीरा सिंह, ममता सिंह, उमा जी, सीमा जी, उषा, कुमार भृगु, विमल दास, कंचन जी, गुंजन जी और क्रांति सहित कई कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा।जिला मीडिया प्रभारी आरती शर्मा ने जानकारी दी कि बस्ताकोला के अलावा जिले के धनबाद गायत्री नगर, कुमारधुबी, सिंदरी, जामाडोबा शक्तिपीठ, टुंडी, कतरास, सुदामडीह, शालीमार, दिग्वाडीह ड्राइवर कॉलोनी और हाउसिंग कॉलोनी स्थित गायत्री मंदिरों में भी गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
